tag:blogger.com,1999:blog-6735016985377813638.post7553290080453483843..comments2007-09-11T12:25:49.202+05:30Comments on पी एच पी ज्ञान: [प्रारंभिक] पीएचपी में दिनांक से खेलें - भाग 1विपुल जैनhttp://www.blogger.com/profile/06062191694422310621noreply@blogger.comBlogger3125tag:blogger.com,1999:blog-6735016985377813638.post-64497187288848326672007-09-11T12:25:00.000+05:302007-09-11T12:25:00.000+05:30मै यह मान कर लिख रहा हूँ के पाठक को बिलकुल भी कुछ ...मै यह मान कर लिख रहा हूँ के पाठक को बिलकुल भी कुछ नहीं आताविपुल जैनhttp://www.blogger.com/profile/06062191694422310621noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6735016985377813638.post-79404855942713077322007-09-11T01:03:00.000+05:302007-09-11T01:03:00.000+05:30भायो अच्छा काम कर रिए हो। लेकिन इन छोटी छोटी कमांड...भायो अच्छा काम कर रिए हो। लेकिन इन छोटी छोटी कमांड बताने के लिए फोटो बनाने की ज़रूरत नहीं। जब मुश्किल चीज़ें शुरू हो जाएं, तब फोटो शोटो डालें।रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6735016985377813638.post-76704929859864633582007-09-10T23:32:00.000+05:302007-09-10T23:32:00.000+05:30यह पाठ स्पष्ट है एवं समझ में आया. ऐसा ही लिखते रहे...यह पाठ स्पष्ट है एवं समझ में आया. ऐसा ही लिखते रहें -- शास्त्री जे सी फिलिप<BR/><BR/><BR/><BR/>आज का विचार: चाहे अंग्रेजी की पुस्तकें माँगकर या किसी पुस्तकालय से लो , किन्तु यथासंभव हिन्दी की पुस्तकें खरीद कर पढ़ो । यह बात उन लोगों पर विशेष रूप से लागू होनी चाहिये जो कमाते हैं व विद्यार्थी नहीं हैं । क्योंकि लेखक लेखन तभी करेगा जब उसकी पुस्तकें बिकेंगी । और जो भी पुस्तक विक्रेता हिन्दी पुस्तकें नहीं रखते उनसे भी पूछो कि हिन्दी की पुस्तकें हैं क्या । यह नुस्खा मैंने बहुत कारगार होते देखा है । अपने छोटे से कस्बे में जब हम बार बार एक ही चीज की माँग करते रहते हैं तो वह थक हारकर वह चीज रखने लगता है । (घुघूती बासूती)Shastri JC Philiphttp://www.blogger.com/profile/00286463947468595377noreply@blogger.com